साल 1978 में आई सत्यम शिवम सुंदरम आंतरिक और बाहरी सुंदरता के बीच फ़र्क का बेहद ख़ूबसूरत संदेश देती है। रूपा की मधुर आवाज़ सुनकर नायक को लगता है कि देखने में भी वो उतनी ही सुंदर होगी और अपनी कल्पना को हक़ीक़त मानकर वो उससे प्यार करने लगता है।from Jagran Hindi News - entertainment:bollywood https://ift.tt/3lKjXJL
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